Home Education जानिए Tally की महत्वपूर्ण बेसिक जानकारियां

जानिए Tally की महत्वपूर्ण बेसिक जानकारियां

दोस्तो क्या आप को टैली से डर लगता है ? क्या आप किसी सेन्टर पे जाके टैली सीखे है ? क्या आप कॉमर्स के स्टूडेंट्स है ? क्या आप को मैथ्स नहीं आता अगर आप ऐसा सोच रहे है तो ये सारी बाते अपने दिमाक से निकाल दीजिए हैं जी है आप तब भी बहुत आसानी से टैली सीख सकते है. बस इस आर्टिकल को पूरा पड़े आप के लिए बहुत हेल्पफुल होगा तो आइये शुरू करते है…

टैली एक एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर है जिससे आप जोड़ ,घटना , गुणा भाग, बस और इसके रुल को कैसे फॉलो करे बस और कुछ ज्यादा नहीं थोड़ा-सा दिमाक लगाना है बस अगर आप को इसकी हिस्ट्री जानना है तो आप “टैली की हिस्टरी मेरे पिछले आर्टिकल में बताया है उसमें History से related साड़ी जानकारी दी गयी है. इस आर्टिकल में हम पिछले आर्टिकल में के कुछ टॉपिक लिए थे तो आज हम इस आर्टिकल में उसी टॉपिक के बारे में चर्चा करेंगे . आप परेशान मत होइए बिल्कुल शांत भाव से आप सीखिए बस आप को रुल थोड़ा ध्यान लगाना होगा
उदहारण – अगर रुल की बात की तो जैसे आप किसी चीज को मतलब आप बाइक ही चलते है तो उसमे भी एक रुल होता है और आप बस उसी रुल को फॉलो करते है और धीरे-धीरे आप काफी अच्छे से चला लेते है तो वैसे ही इसमें थोड़ा रुल को फॉलो करना होगा बस और कुछ नी

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Capital (पूजी): पूजी वह होता है जो हम अपने बिजनेस की सुरु करने में लगाए है
जैसे_ आप मान लो येक किराना स्टोर खोलते हो तो उस किराना स्टोर में को पैसा लगाए हो वही है capital ( पूजी)

Assets( संपत्ति): संपत्ति वह होती है जो हम अपने बिजनेस को चालू करने में लगाते है जिसका कोई कोई मूल्य होता है और इसको हम अपने बिजनेस के संचालक व आय के लिए किया जाता है

उदहारण के लिए

मशीन , भूमि,मकान ,गाड़ी, मोटर आदि

इस तरह के संपत्ति को हम जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल कर सकते है बाद में हम इसको बेच भी सकते है

ये दो प्रकार की होती है

स्थाई संपत्ति ( fixed Assets)
चालू संपत्ति ( current Assets)

    • Fixed Assets– ऐसी संपत्ति जो हम अपने बिजनेस को चालू कराने में लगाते है
      जैसे_ कंप्यूटर,कुर्सी,टेबल, गाड़ी मोटर , मकान, ऐसी वस्तु जिसे आप कम्पनी को चलने के लिए खरीदे है
      और बाद ने ये वस्तु आप के उसी रेट प्रतिशत के भाव से आप इसे sale भा भी कर सकते है
    • 2 current assets- ऐसी संपत्ति जिसे हम अपने बिजनेस में क्या बेचेंगे को सारी चीजे आती है
      जैसे _ आप अपने कम्पनी में जो भी चीज को बेचना या बनाना चाहते है मान लो आप से किराना स्टोर में को चीज बेचते है साबुन, दाल, मटर,चावल, आटा, आदि

Sundry deptor: इसका मतलब होता है देनदार , आप अपने कम्पनी/ शॉप से किसी पार्टी को माल बेचते है उसी को हम sundry debtor काहते है

Sundry creditor: का इसका मतलब ये होता है कि जिससे हम माल/ सेवा खरीदते है

Liabilities (दायित्व): वह धन जो किसी दूसरे को देना हो उसे हम दायित्व कहते है
जैसे_ जैसे आप अपने किराना स्टोर में बेचने के लिए कुछ सामान लाय वो भी उधारी पे तो उस उधारी वाला पैसा जो है वो आप की दायित्व है उसको भूक्तान करना
ये दो प्रकार की होती है
l.Current liabilities
ll.Non current liabilities

    • Current liabilities- ऎसी दायित्व जिसका देन हम उसी बित्तीय वर्ष या इससे कम समय में भुक्तान करना
      Short term liabilities
    • Non current liabilities – ऎसी दायित्व जिसका देन उसी बित्तीय वर्ष या उससे ज्यादा समय में देना
      Long term liabilities

Income ( आय ): आय उसे कहते है जो हमने अपने कम्पनी या शॉप के जरिए कमाए हो. उसे Income कहते हैं.
ये दो प्रकार के होते है.

  • डायरेक्ट इनकम: ये इनकम वह इनकम होती है जिसे हम डायरेक्ट कमाए मतलब हम किसी सामान को बेचा और हम पैसे मिले तो उसी पैसे को हम डायरेक्ट इनकम कहते है. जैसे- Sale से कमाए पैसे को डायरेक्ट इनकम कहते हैं.
  • इनडायरेक्ट इनकम– ये इनकम वह इनकम होती है जो हम किसी अलग तरीके से हमाए जैसे हम किसी सामान को खरीदे और हम उस सामान पर डिस्काउंट मिला तो जो डिस्काउंट मिला है उसी पैसे को इनडायरेक्ट इनकम कहते है. जैसे-इंटरेस्ट recieved, गिफ्ट recieved, डिस्काउंट recieved, आदि

Expence ( खर्चा): खर्चा उसे कहते है जो हम अपने कम्पनी को चलने और और बहुत सारी कामो पे जो पैसे खर्च किए होते है उसे हम expence कहते है
ये दो प्रकार की होते है

  • Direct expence- इसका मतलब ये होता है जो खुद के हाथ से खर्चा किए हो उसे हम डायरेक्ट expence कहते है
    जैसे _ पैकिंग, पर्चेस, फ्रेट, टूल प्लाजा , आदि ये हमारे डायरेक्ट expence में आते है
  • Indirect expence: ये ऐसे खर्च में आता है जिसे हम खुद अपने हाथ से नी बल्कि किसी और के हाथ से खर्च हुए है जैसे _ रेंट,बिल, डिस्काउंट देना, कमिशन देना, आदि ये हमारे इनडायरेक्ट एक्सपेंस में आते है

Purchase ( क्रय): क्रय उसे कहते है जो हम किसी पार्टी से सामान खरीदे हैं (उस सामान को हम पर्चेस कहते है) और (पार्टी को sundry creditor कहते हैं).

Purchase return ( क्रय वापसी): मतलब हम किसी सामान को खरीद के लाय और वह खराब निकाल गया या फिर नहीं बिका तो हम उसे वापसी करते है तो उसी को हम Purchase return कहते है
Sale ( विक्रय )-विक्रय वह होता है जो हम सामान खरीद के लाये है बेचने के लिए उसे हम विक्रय कहते है.

Sale return ( विक्रय वापसी ): जो सामान हम बेचे और कुछ कारणों से को वापसी हो गए हो उसे हम sale return कहते है

Gross profit/loss: सकल लाभ और हानि खाते पर प्राप्त आंकड़ा है जब बेची गई वस्तुओं की लागत किसी व्यवसाय की बिक्री राजस्व से काट ली जाती है। तो उसमे हम इस फार्मूले से पता लगाते है
gross profit / loss ,कितना है

Gross profit =[ direct income ] – [ direct expence]

Net profit / loss___ शुद्ध लाभ वह है जो सकल लाभ से निश्चित खर्च को घटाने के बाद बचा है।
Net profit = [ gross profit] + [indirect income] – [indirect expence]

सभी लागतों को घटाने के बाद एक कंपनी का शुद्ध लाभ उसका लाभ है।

Discount (डिस्काउंट): एक नकद, या बिक्री, छूट वह है जो आप एक ग्राहक को किसी सामान के ऊपर देते है
ये दो प्रकार के होते है

    • Cash discount 
      यह वह डिस्काउंट है जो हम पैसे पे देते है
      जैसे _ 10,20,30,50,100, आदि प्रकार से
    • Trade discount

यह वह डिस्काउंट है जो हम पैसे पे ना देके % प्रतिशत में देते है. जैसे –10%,5%,9%,3%,1%,20% आदि प्रकार से

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