Home Health मनुष्य की प्रवृत्ति मांसाहारी है या शाकाहारी? जानिए क्या है अंतर...

मनुष्य की प्रवृत्ति मांसाहारी है या शाकाहारी? जानिए क्या है अंतर…

आज कल के दौर मे अधिकतर लोगों के मन में एक प्रशन उठता है की वह मांसाहारी है या शाकाहारी है । क्युकि आज के समय मे कुछ लोग शुद्ध शाकाहारी होते है और उसी के साथ कुछ मासाहारी तो कुछ सर्वाहारि भी होते है इसी करण से लोगो के मन मे यह प्रशन उत्पन्न होता है की वह आखिर है क्या उसकी संरचना शाकाहारी जीव जन्तु की तरह है या मासाहारी जीव जन्तु की तरह होती है तो आज हम आपको कुछ तथ्योब्के अनुसार यह समझाने की कोशिश करेंगे की अखिर मनुष्य की शारिरीक संरचना और मानशिक संरचना किस प्रकार की होती है और वह किस प्रकार के जीव जन्तु से मेल खाता है शाकाहारी या मासाहारी ?

वैसे तो एक तरफ से देखा जाये तो मनुष्य एक अवसर वादी प्राणी है अवसर वादी का तात्पर्य यह है की उसको जो मिलता है situation के हिसाब से adjust करता है क्युकि किसी भी जीव की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी भूख होती है। तो इस प्रकार मनुष्य अपने बर्ताव से तो सर्वभक्षी होता है परन्तु मनुष्य शारिरीक और मानशिक कुछ और होता है तो जानिए अखिर मनुष्य है क्या

अगर मनुष्य मासाहारीयो की तरह सिर्फ मांस खाए तो-

मासाहारीयो की तरह मांस खाने का मतलब यह है की मनुष्य सिर्फ कच्चे मांस का सेवन करता है तो उससे किस प्रकार की समस्याओ का सामना करना पड़ेगा-

  • फाइबर

अगर मनुष्य सिर्फ मांस खायेगा तो उसको सबसे बड़ी यह समस्या होगी कि उसको मांस से फाइबर नही मिलेगा।जो मनुष्य को वनस्पति से मिलता है अर्थात मनुष्य अगर सिर्फ मांस का सेवन करता है तो उसे फाइबर नही प्राप्त होगा जिससे जो हमारी जो छोटी आँते होती है अगर उसमे प्रयाप्त मात्रा मे फाइबर नही जायेगा तो उसमे खाना आगे नही बढ़ेगा इससे कब्ज जैसी समस्या हो जायेगी क्युकि फाइबर हमारे खाने को पचाने के लिये बहुत जरुरी होता है।

  • कोलेस्ट्रॉल

अगर मनुष्य सिर्फ मांस खा रहा है तो जितने भी पशु प्रदार्थ है उसमे भरपूर मात्रा मे कोलेस्ट्रॉल होता है और जब मनुष्य इसका सेवन करेगा तो उसको बाहर से अधिक मात्र मे कोलेस्ट्रॉल मिलेगा और यह एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल मनुष्य का पाचन तंत्र पचा नही सकता इसको कैसे नियन्त्रित करना होता है यह मनुष्य के शरीर को आता ही नही है यह सारा कोलेस्ट्रॉल मनुष्य कि धमनियो और सीरओ मे बैठ जाता है और इससे मनुष्य को circulam disease , दिल ला दौरा ( heart attack), stroke जैसी बिमारी हो जायेंगी।

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vitamin C को मनुष्य का शरीर खुद बनाने के लिये सक्षम नही होता है मनुष्य के शरीर को विटामिन C बाहर से ही लेना होता है और अगर मनुष्य सिर्फ मांस खा रहा है तो मनुष्य का शरीर मांस मे से विटामिन C नही निकाल पायेगा क्युकि मांस मे विटामिन C निकलना बहुत मुश्किल है और जो मांस भक्षी प्राणी होते है वो विटामिन C खुद बना लेते है इसलिये उन्हे इस समस्या का सामना नही करना पड़ता ।

  • विटामिन A

जब मनुष्य किसी पशु प्रदार्थ को खाता है तो उसमे से जो विटामिन A मिलता है वो रेटिनोल होता है और रेटिनोल को नियन्त्रित करने मे मनुष्य के liver पर काफी ज्यादा load पड़ता है जिससे liver मे सूजन आने जैसी समस्या हो जाती है ।

  • काबोहाइड्रेट्‌

जब मनुष्य सिर्फ जीव प्रदार्थ खायेगा तो उससे मनुष्या को सिर्फ fat और protine अधिक मात्रा मे मिलेगा और मनुष्य के शरीर को energy के लिये काबोहाइड्रेट्‌ बहुत जरुरी होता है और मांस से मनुष्य के शरीर को fat और protine से energy निकलना पड़ेगा जो बहुत ही मुस्किल होता है और अधिक प्रोटीन खाने से liver और kidney पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा।

                              शारीरिक समानता प्राणी होते है

जीभ के रिसेप्टर्स( जो खाने के taste को महसूस करवाये)

मनुष्य के जीभ पर मांस के रिसेप्टर्स नही होते है अगर किसी मनुष्य कि जीभ पर मांस का टुकडा रख दिया जाये तो वह उसे पसंद नही आयेगा और उसे थूक देगा इसी कि तुलना मे जो मासाहारी प्राणी होते है उनकी झीभ मे मांस के रिसेप्टर्स होते है और उन्हे मांस का taste आता है उसी प्रकार हम मांस को पकाते है उसमे वनस्पति मिलाते है तब उसे खा पाते है क्युकि मनुष्य को सिर्फ वनस्पति का taste आता है ।

  • जबड़ों कि तुलना

जो भी मासाहारी प्राणी होते है उनका जबड़ा काफी मजबूत होता है इसकी तुलना में जो शाकाहारी प्राणी होते है उनके जबड़े काफी कमजोर होते है और उसकी बनावट भी काफी कमजोर होती है। मासाहारीयो कि तुलना मे जो भी शाकाहारी प्राणी होते है उनका जबड़ा side side मे भी हिलता है क्युकि उन्हे खाना चबाना होता है परन्तु जो मासाहारी प्राणी होते है उनका जबड़ा सिर्फ ऊपर नीचे ही होता है क्युकि उन्हे मांस को काटना होता है इसी करण से जो भी शाकाहारी प्राणी होते है उनकें दांत एक के ऊपर एक समान अवस्था मे व्यवस्थित होते है वही जो मासाहारी जानवर के दांत cross fit होते है क्युकि वे उससे आसानी से मांस काट सके।

  • गले कि बनावट

जो भी मासाहारी प्राणी होते है उनका जो मुह और गला शरीर के मुकाबले मे बडा होता है जैसे 100% शरीर मे 35% मे सिर्फ गला होता है।क्युकि उन्हे बड़ा जबड़ा खोलकर मास के बड़े टुकड़ो को निगलना पड़ता है।इसी कि तुलना मे जो शाकाहारी प्राणी होते है उनका गला उनके शरीर के 100% मे सिर्फ 16% भाग मे ही होता है क्युकि शाकाहारीयो को चबाया हुआ खाना निगलना होता है और उन्हे काफी बड़ा जबड़ा भी नही खोलना पड़ता है।

  • पेट की तुलना

शाकाहारी प्राणी का जो पेट होता है वह पूरे पाचन तंत्र मे सिर्फ 25% ही होता है उसकी तुलना मे जो मासाहारी प्राणी होते है उनका पेट पूरे पचन तंत्र मे 60% से 70% तक होता है क्युकि उन्हे जब भी खाना मिले वे उस खाने को काफी जयादा खा सेक।क्युकि वे जानते है कि उन्हे उसके बाद कब खाना मिले कब ना मिले। उन्हे काफी दिनो तक भूखे भी रहना पड़ता है।

मासाहारी प्राणी जो होते है उनके पेट का PH value (acidic level) 1 या उससे भी कम होता है यह ज्यादा acidic इसलिये होता है क्युकि bacteria से भरा खाना खाना होता है और आपको बता दे इतने acidic पेट मे हड्डिया तक गल जाती है और जो शाकाहारी प्राणी होते है उनका ph value 4 से 5 जो बहुत ज्यादा acidic नही होता है इतने कम ph value वाले पेट मे ना ही ज्यादा bacteria मारेंगे और ना ही हड्डिया गलेंगी । जित्ने भी शाकाहारी प्राणी होते है उनकी जो आँते होती है वह उनके खुद के शरीर के 9 से 12 गुना बड़ी होती है और मासाहारी की आँते उनके शरीर से सिर्फ 4 गुना बड़ी होती है।

  • मानशिक रूप से

इतनी समानताओ से यह निष्कर्ष तो निकल गया कि मनुष्य शारीरिक तौर से काफी हद तक शाकाहारी जीवो से मिलता है परन्तु मानसिक रूप से भी मनुष्य मासाहारीयो से मेल नही खाता है जैसे- अगर किसी मनुष्य के सामने किसी जानवर का कटा हुआ सर रखा हो या खूब खून खच्चर हुआ हो और कहा जाये कि खून से लतपत मांस को वह टच करे या खाए टौह वह यह चीजे नही कर पायेगा।वह तुरंत उसे अपने से दूर कर देगा। जो हर इन्सान कि प्रवृत्ति होती है जब हमारे पूर्वजो ने आग का अविष्कार किया तब से मनुष्यो मे यह changes आ गये और कच्चा मांस ना खा पाने कि प्रवृत्ति उत्पन्न हो गयी।

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